श्रवण एवं भाषा के विकास क्रम

सुनने एवं बोलने के व्यवहार का विकासक्रम एवं नवजात शिशुओं में भाषा का विकास जैसे-जैसे बच्चा शारीरिक एवं मानसिक रूप से बडा होता जाता हैं, आवाज के प्रति उसकी व्यवहारिक प्रतिक्रिया विकसित और ज्यादा कठिन हो जाती हैं। इन व्यवहारों का बच्चे की उम्र एवं बौद्घिक स्तर से सीधा संबंध हैं।

जन्म से तीन महींने तक

ऑडिटरी रिसपॉन्स (Auditory Response): अगर जोर से आवाज की जाए जैसे कि ताली या अलार्म की आवाज आदि, तो आपका शिशु नींद से जाग जाएगा या हिलना-डुलना शुरू कर देगा या जागना शुरू कर देंगा। जोर की आवाज सुनते ही, शिशु रोना शुरू कर देंगा एवं चौकना (startle) करना शुरू कर देगा।

बोली एवं भाषा का विकास: आपके बच्चे को कूइंग (cooing) में आनंद आता हैं (कूइंग आवाज निकालना) और 'गर्गलिंग' में आनंद आता हैं (गडगड की आवाज निकालना)

तीन महीने से छह महीने तक

ऑडिटरी रिसपॉन्स (Auditory Response): बच्चा अपनी माँ की आवाज को मुख्यत: पहचानने लगता हैं जैसे कि अगर बच्चा रो रहा हैं तो वह अपनी माँ की आवाज सुनकर चुप हो जाता हैं।

जब उसके साथ बोलते हैं तो बच्चा हँसता हैं, खेलते हुए रूक जाता हैं एवं आवाज सुनने की कोशिश करता हुआ मालूम पडता हैं, मुख्यत: जब कोई अच्छी ध्वनी निकाली जाए या कोई नयी आवाज निकाली जाए। उदाहरण के लिए नए खिलौने की आवाज।

जानकारी:

http://bharat.gov.in, भारतीय राष्‍ट्रीय पोर्टल (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं)

अंतिम अद्यतन दिनांक : २२/०३/२०१७