समाज की भूमिका

श्रवण-विकलांग व्यक्तियों के पुनर्वसन/कल्याण में समाज की भूमिका

श्रवण-विकलांग व्यक्तियों (बच्चों एवं वयस्कों) का पुनर्वसन एक चुनौतीपूर्ण कार्य हैं एवं इस कार्य के लिए सरकारी एवं/या गैर-सरकारी संगठनों से जुडें व्यावसायिकों के समूह की जरूरत पडती हैं। सामाजिक कार्यकर्ताओं की भी इसमें विशेष भूमिका होती हैं।

विकलांग व्यक्तियों के रहन-सहन एवं जीवन का स्तर तभी सुधारा जा सकता हैं, जब विकलांग व्यक्तियों के साथ समाज के सदस्यों, उनके अभिभावकों /परिवार के सदस्यों एवं मित्रों तथा सरकारी एवं/या गैर-सरकारी संगठनों के बीच गहरी सहभागिता, ताल-मेल एवं सामजस्य हो।

विकलांग व्यक्तियों के पुनर्वसन की जरूरतों के लिए, सामाजिक रूप से प्रभावशाली सहभागिता की जरूरत हैं क्योंकि विकलांग व्यक्तियों के पुनर्वसन में समाज मुख्य एवं अहम भूमिका निभाने के लिए प्रतिबद्घ हैं।

विकलांग व्यक्तियों के जीवन की विभिन्न अवस्थाओं में बहुत से पहलुओं पर ध्यान देंने की जरूरत पड सकती हैं, इसलिए इस बात पर ध्यान रहना चाहिए कि विकलांग व्यक्ति के जीवन में उन्हें विशिष्ट चरण में कौन सी चीज़ महत्वपूर्ण हैं?

लंबे समय के श्रवण-दोष के कारणों पर ध्यान न देने पर, वाचा एवं भाषा प्रलंबन की समस्या उत्पन्न हो सकती हैं।

बच्चों के अभिभावकों को मदद एवं सलाह दी जानी चाहिए, ताकि वे बच्चों में श्रवण-दोष की पहचान कर सकें। बच्चों में होने वाले चालकीय श्रवण दोष के निम्न लक्षण हो सकते हैं:

  • श्रवण-दोष घटता-बढता हैं।
  • वाचा एवं भाषा में देरी होती हैं।
  • ध्यान आसानी से भंग हो जाता हैं।
  • चिंतित दिखाई देता हैं।
  • विद्यालय में शैक्षिक प्रगति खराब होती हैं।
  • व्यवहार से संबंधित समस्याएँ होती हैं।
  • कभी-कभी ठीक से सुनाई पडता हैं और कभी-कभी सुनाई नहीं पडता हैं।
  • कही गई बातों को दोहराने की जरूरत पडती हैं, इत्यादि।

थोडे से बडे बच्चों में, सुनने की समस्या एवं व्यवहार की समस्या में भ्रम पैदा हो सकता हैं। लगातार ध्यान न दें पाना, विद्यालय में शैक्षिक प्रगति औसत से कम और लगातार सर्दी एवं कान में दर्द का रहना, इस बात के संकेत हैं कि सुनने की समस्या हो सकती हैं और इसलिए इन समस्याओं को अनदेखा नहीं किया जाना चाहिए। सामाजिक कार्यकर्ताओं को अभिभावकों की अपने बच्चों की श्रवण-क्षमता की जाँच योग्य ऑडिओलॉजिस्ट द्वारा कराने में मदद करनी चाहिए और/या बच्चे की जाँच ईएनटी विशेषज्ञ (ENT Specialist) द्वारा होनी चाहिए।

श्रवण-दोष का शीघ निदान होना आवश्यक हैं

सरकारी एवं गैर-सरकारी संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का उद्देश्य बच्चों में श्रवण-दोष की शीघ्र पहचान के बारे में जन-जागरूकता फैलानी चाहिए।

जीवन के शुरुआती 3 से 5 वर्षो में, अच्छी वाचा एवं भाषा कौशलों के विकास के लिए महत्वपूर्ण हैं एवं श्रवण-दोष जो कि पहचाना न जा सके, आगे जाकर वाचा एवं भाषा की समस्या उत्पन्न कर सकता हैं एवं कुछ परिस्थितियों में व्यवहार की भी समस्या उत्पन्न कर सकता हैं। इसलिए श्रवण-दोष जितनी जल्द पहचाना जाएगा, उतना ही वह बच्चे के संपूर्ण विकास में मददगार होगा।

सामाजिक कार्यकर्ताओं को, इस बात को दिमाग में रखने की जरूरत हैं कि बच्चा साधारण रूप से किस गति से वाचा एवं भाषा विकसित करता हैं एवं सीखता हैं एवं अभिभावकों को बच्चे के जीवन की विभिन्न अवस्थाओं पर क्या आशा रखनी चाहिए।

प्री-स्कूल में जाने वाले बच्चे के लिए ऍम्प्लीफिकेशन (Amplification) ध्वनि संवर्धन की आवश्यकताओं पर लक्ष्य केन्द्रित होना चाहिए। अगर ऍम्प्लीफिकेशन की जरूरत दिखाई देंती हैं, तो यह बेहतर होगा कि बच्चे की श्रवण-क्षमता की जाँच की जाए एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं को इस बारें में अभिभावकों की हर संभव मदद करनी चाहिए।

शीघ्र हस्तक्षेपन /सहायता आवश्यक
अगर श्रवण-क्षति से ग्रसित बच्चे के जीवन में शुरुआती अवस्था में मदद मिल जाए, तो दोष के प्रभाव को काफी कम किया जा सकता हैं।

सामाजिक कार्यकर्ताओं को छोटें बच्चों के परिवारों की मदद करनी चाहिए एवं प्रोत्साहित करना चाहिए, ताकि वे रोक-थाम करने वाले कार्यक्रमों एवं सेवाओं में जल्द सम्मिलित हो सकें। ऐसे हस्तक्षेपन /सहायता एवं रोक-थाम वाले कार्यक्रम एवं सेवाएँ सामाजिक स्तर पर उपलब्ध हैं, ताकि छोटें बच्चों की जरूरतों को पूरा किया जा सके।

श्रवण-दोष पूर्णतया स्थायी या अस्थायी हो सकता हैं

स्थायी एवं अस्थायी दोनों प्रकास के श्रवण-दोष विभिन्न कारणों की वजह से होते हैं।

जितनी जल्दी सुनने की समस्या पहचान में आएगी, उतनी जल्दी बच्चे के संपूर्ण विकास में मदद मिलेगी।

सामाजिक कार्यकर्ताओं को अभिभावकों और उनके परिवारों को प्रोत्साहित करना चाहिए कि वे कार्यरूप में ऐसी समस्याओं को पहचानने एवं उसका प्रबंध करने में सक्रिय सहभागी हो सकें।

अच्छा व्यक्तिगत संबंध सभी स्तर पर जरूरी हैं

सामाजिक कार्यकर्ताओं को अभिभावकों के पूर्ण सहयोग के उद्देश्य को लेकर कार्य करना चाहिए। यदि इस बात का ध्यान रखा जाएगा, अभिभावकों को प्रशिक्षण /सलाह /मार्गदर्शन इत्यादि कार्यक्रमों में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा, तो इसके फलस्वरूप अवश्य सफलता आएगी।

सामाजिक कार्यकर्ता और /या व्यावसायिक किस हद तक मरीज एवं उनके अभिभावकों की समस्याओं से सरोकार रखते हैं, यह उनकी समस्याओं की अपनी रूचि एवं व्यावसायिक मरीज, व्यावसायिक - अभिभावक एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं - अभिभावकों के उपयोगी संबंधों पर निर्भर करता हैं।

  • विकलांग व्यक्ति / बच्चे, जो कि स्थायी श्रवण-दोष / स्थायी स्थिति से ग्रसित हैं, उन्हें निरतर देखभाल और /या जीवन पद्घति में सुधार की जरूरत पड सकती हैं।
  • शैक्षिक जरूरतें जो विभिन्न स्तर पर पैदा हो, उनपर विशेष ध्यान देना चाहिए।

सामाजिक स्तर पर पुनर्वसन का उद्देश्य पूर्णरूप से आथिर्क पुनर्वसन होना चाहिए

जहा तक संभव हो, सामाजिक कार्यकर्ताओं को पुनर्वसन कार्यक्रम की योजना बनाना, कार्यान्वित करना एवं मॉनिटरिंग करने की पूरी जिम्मेदारी उठानी चाहिए।

सामाजिक कार्यकर्ताओं को इस बात की जिम्मेदारी उठानी चाहिए कि श्रवण-विकलांगों के कल्याण के लिए उपलब्ध सरकारी योजना PWD पीडब्ल्यूडी विकलांग व्यक्तियों तक पहुँच सकें। उपलब्ध योजनाओं के बारें में एक जागृति पैदा करनी चाहिए।

स्तर पर सामाजिक सहभागिता, पुनर्वसन कार्यक्रम का एक अभिन्न अंग हैं एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं सदस्यों को इसमें विशेष तौरपर सक्रियता से सहभागी होना चाहिए।

  • सामाजिक जागरूकता पैदा करना
  • स्थानीय साधनों /स्रोतों को उपयोग में लाना
  • पुनर्वसन कार्यक्रम के लाभ एवं हानि संबंधी जानकारी देंना।

जानकारी:

http://bharat.gov.in, भारतीय राष्‍ट्रीय पोर्टल (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं)

अंतिम अद्यतन दिनांक : २२/०३/२०१७