पाठ्य का आकार:
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कंट्रास्ट योजनाएं:
माता-पिता बच्चों के पहले एवं नैसर्गिक शिक्षक होते हैं एवं प्रायः हमेशा सभी बच्चे भाषा अपने माता-पिता से सीखते हैं। अभिभावकों को अपने बच्चों में संप्रेषण एवं भाषा कौशल विकसित करते समय आनेवाली कठिनाइयों को सुलझाने में सहायता हेतु पत्राचार पाठ्यक्रम की रचना की गई हैं। अभिभावकों को भाषा विकास में मदद के लिए घर-पर अध्ययन की योजना प्रदान की जाती हैं, जिससे घर पर वे भाषा को विकसित करने में सहायक वातावरण बना सकें। बच्चे की शैशवावस्था 0 से 5 साल तक भाषा ग्रहण करने के लिए संवेदनशील समय हैं।
इस समय ऐसे पत्राचार पाठ्यक्रम बहुत संस्थानों में विविध भाषाओं में उपलब्ध हैं। इनमें से कुछ संस्थाओं के पते इस प्रकार हैं
लगभग सभी पत्राचार पाठ्यक्रम अभिभावकों के लिए नि:शुल्क हैं।
इन कार्यक्रमों का उद्देश्य श्रवण-विकलांग बच्चों की बचपन में ही पहचान करना हैं। इस कार्यक्रम का उद्देश्य संबंधित बच्चे के समग्र विकास का निरीक्षण करनासंकल्पना का उद्देश्य छोटे बच्चों को भाषा सीखने में प्रेरक वातावरण से परिचित कराना हैं, ताकि श्रवण-विकलांग बच्चे प्राकृतिक भाषा ग्रहण कर सकें। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य अभिभावक को सक्षम बनाना हैं। जैसा की नाम से विदित हैं, इसमें अभिभावक एवं बच्चे साथ-साथ सहभागी होते हैं एवं अभिभावकों को उन विभिन्न विधियों द्वारा परिचित कराया जाता हैं, जिससे उनके बच्चे भाषा ग्रहण कर सकें, अगर इस अवस्था में वह विकसित नहीं हुई हैं तो इस अवस्था में भाषा का पर्याप्त रूप से विकसित न होना, आगे जाकर उनके विधिवत शिक्षण में बाधक बन सकता हैं।
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अंतिम अद्यतन दिनांक: २७/०७/२०१२