पाठ्य का आकार:
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कंट्रास्ट योजनाएं:
ऐसे बच्चे, जिनका निदान विलम्ब /देस से हुआ हैं या जिन बच्चों की क्रियात्मक भाषा का विकास नहीं हुआ हैं उन्हें विशेष प्री-स्कूल में दाखिल किया जाता हैं। विशेष स्कूलों में विशेष शिक्षक, इन बच्चों की भाषा की नीव मजबूत बनाने में सहायता करते हैं जिससे उनकी आगे की प्राथमिक एवं माध्यमिक औपचारिक शिक्षा आसानी से पूरी हो सके यह बच्चे की अध्ययन सफलता (उपलब्धि) पर निर्भर हैं कि उसे समेकित स्कूल या विशेष स्कूल में दाखिल करना चाहिए।
यह बच्चे की प्रगति के आधार पर विशेष विद्यालय में या नियमित विद्यालय के साथ संयुक्त रूप से हो सकता हैं। विशेष विद्यालयों के शिक्षक संप्रेषण की कला को विकसित करने के लिए विविध गतिविधियों /तंत्रों का सहारा लेते हैं। बच्चों की जरूरतों को ध्यान में रखकर विशेष प्री-स्कूल पाठ्यक्रम की रचना की जाती हैं एवं ऐसी गतिविधियों का संचालन किया जाता हैं जैसे निर्देशित गतिविधियाँ, कथा कथन, मार्गदर्शित नाटक इत्यादि जिससे कि श्रवण-विकलांग बच्चे अभिव्यक्त करनेवाली भाषा प्री-स्कूल में सीख सकें।
विशेष प्री-स्कूल कार्यक्रम ए. वाइ. जे. एन. आइ. एच. एच., मुंबई में एवं इसके आंचलिक केन्द्रों में जो कि पूरे देश में फैले हैं, चलाए जाते हैं। ए. वाइ. जे. एन. आइ. एच. एच. में अल्पवयस्क /छोटे श्रवण विकलांग बच्चों के लिए आदर्श प्री-स्कूल अभ्यासक्रम उपलब्ध हैं।
समेकित प्री-स्कूल कार्यक्रम के बच्चे या विशेष स्कूलों में शिक्षा प्राप्त करने वाले बच्चे नियमित प्राथमिक विद्यलयों में दाखिल किए जाते हैं। श्रवण-विकलांग बच्चे उसी पाठ्यक्रम का अध्ययन करते हैं, जो कि राज्य में स्टेट बोर्ड ऑफ स्पेशल एज्युकेशन द्वारा निर्धारित हैं, लेकिन उन्हें भाषा एवं मौखिक मूल्यांकन में छूट दी जाती हैं। विशेष शिक्षक या स्रोत शिक्षक द्वारा विशेष सहायता उन्हें अपने सुनने वाले सहपाठियों के समकक्ष प्रगति करने में मदद करती हैं।
वे बच्चे जो अभी तक अच्छी भाषा एवं संवाद की कला नहीं विकसित कर पाए हैं, एवं जिन्हें लिखने एवं पढने में सहायता की आवश्यकता हैं, वे अपनी प्राथमिक शिक्षा विशेष स्कूल में जारी रखते हैं। विशेष शिक्षक वैयक्तिक शैक्षणिक कार्यक्रम बनाते हैं एवं विशेष पाठ्यक्रम विकसित करते हैं, ताकि विशेष बच्चों की वैयक्तिक जरूरतें पूरी हो सकें। स्टेट एज्युकेशन बोर्ड द्वारा निर्धारित पाठ्यक्रम के अलावा, विशेष शिक्षक उन गतिविधियों की जिम्मेदारी लेते हैं, जिससे कि ग्रहण करने वाली एवं अभिव्यक्त करने वाली भाषा मजबूत बन सके।
समेकित प्राथमिक विद्यालयों के बच्चे या विशेष प्राथमिक विद्यालयों के बच्चे माध्यमिक विद्यालयों में प्रवेश ले सकते हैं। विशेष स्कूल में माध्यमिक विभाग बहुत से कारणों से उपलब्ध नहीं हो सकता हैं। बहुत बार, विशेष स्कूलों को राज्य सरकार द्वारा माध्यमिक विभाग चलाने की अनुमति नहीं मिल पाती हैं। इसलिए बच्चों को समेकित विद्यालयों में प्रवेश लेना पड सकता हैं। इस अवस्था में विद्यालय छोडने की घटनाएँ अधिक होती हैं। अभिभावकों को सावधान रहने की चेतावनी दी जाती हैं एवं शिक्षण बाधित न हो, इसलिए विभिन्न विकल्पों पर विचार करने की सलाह दी जाती हैं।
पढाया जानेवाला पाठ्यक्रम स्टेट बोर्ड ऑफ एज्युकेशन द्वारा पूर्वनिर्धारित हैं एवं श्रवण-विकलांग बच्चों को भाषा में छूट प्रदान की जाती हैं एवं भाषा के बदले में दूसरें वैकल्पिक विषयों का चुनाव करना पडता हैं।
बच्चे जो कि एक या अलग कारणों के कारण नियमित प्राथमिक विद्यालयों में दाखिल नहीं किये जा सके, वे अपनी माध्यमिक शिक्षा विशेष स्कूलों में पूरी करते हैं। स्टेट बोर्डं ऑफ एज्युकेशन के माध्यमिक पाठ्यक्रम के अतिरिक्त, उन्हें भाषा में छूट मिलती हैं। बहुत से विशेष स्कूलों में व्यवसाय-पूर्व ज्ञान देंने की भी व्यवस्था हैं।
राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयों उन बच्चों/व्यक्तियों को शैक्षणिक मौका प्रदान करता हैं, जो आगे पढना चाहते हैं, लेकिन नियमित स्कूल में पढना संभव नहीं हैं। यह विकलांग बच्चों को आगे बढने का मौका प्रदान करता हैं, विशेषकर उन बच्चों को जो स्कूल छोड चुके हैं। इस उद्देश्य के लिए, राष्ट्रीय मुक्त विद्यालय ने विशेष मान्यता प्राप्त केन्द्रों की स्थापना की हैं, जिससे कि दुर्भाग्यशाली लोगों को विभिन्न केन्द्रों में पढने में मदद मिले। अली यावरं जंग नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर द हियरिंग हैंन्डीकैप्ड एक ऐसा ही मान्यताप्राप्त केन्द्र हैं, जो कि श्रवण-विकलांग बच्चों की शिक्षा जारी रखने की जरूरत को पूरा करता हैं। यहाँ अंग्रेजी और हिंदी माध्यम में दो कार्यक्रम संचालित किए जाते हैं - मूलभूत पाठ्यक्रम एवं माध्यामिक शिक्षा ।
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अंतिम अद्यतन दिनांक: २७/०७/२०१२