सामान्यत: पूछें जानेवाले प्रश्न

  1. क्या दवाइयों से श्रवण-दोष का इलाज किया जा सकता हैं?
  2. क्या मेरां बच्चा श्रवण-यंत्र की सहायता से कभी सुन पाएगा?
  3. श्रवण-यंत्र किस तरह सहांयक होंगे?
  4. बच्चे को श्रवण-यंत्र कितने दिनों तक पहनना पडेगा?
  5. श्रवण-यंत्र लगाने के बाद, कितने बच्चे सामान्य रूप से अवरो मुक्त गति से बोल पाते हैं?
  6. मेरा बच्चा श्रवण-यंत्र पहनने से इन्कार करता हैं, वह उसे बहुत थोडे समय के लिए पहनता हैं/पहनती हैं। क्यों?
  7. क्या मेरा बच्चा श्रवण-यंत्र पहनने के बाद अच्छी तरह से बोल एवं सुन सकेगा/सकेगी?
  8. क्या मेरा बच्चा जब वह बालना शुरू कर देंगा/देंगी, तो श्रवण-यंत्र पहनना बंद कर सकता हैं?
  9. मेरां बच्चा बहुत ही छोटा हैं। क्या हमे उसके थोडे बडें होने का इतजार करना चाहिए, ताकि वह श्रवण-यंत्र पहन सके?
  10. मेरा बच्चा किसी भी आवाज पर कोई भी यान नहीं देता, क्या वह मुख्य रूप से श्रवण-यंत्रसे सुनता हैं/सुनती हैं?
  11. हमें क्यों एक भाषा में बात करनी चाहिए?
  12. क्या जब हम बाहर जाते हैं, तो मेरें बच्चे को श्रवण-यंत्र पहनना चाहिए?
  13. कभी-कभी मैं क्रोधित हो जाता हूँ / हो जाती हूँ, जब मेरा बच्चा सहयोग नहीं देंता। मुझे क्या करना चाहिए?
  14. मेरे कस्बे के नजदीक कौन से केन्द्र उपलब्ध हैं?
  15. आप मुझे श्रवण-यंत्र क्यों नहीं प्रदान कर रहें हैं? लोग क्या कहते हैं, यह सुनने में मुझे कठिनाई होती हैं?
  16. हमें क्षेत्रीय केन्द्र में कितनी बार जाना पडेगा?
  17. जब मैं उसे उसके नाम से पुकारता हूँ, तो वहं मुड. कर क्यों नहीं देंखता?
  18. 'कॉकलियर इप्लान्ट' (Cochlear Implant) क्या हैं?
  19. मेरा बच्चा कहाँ पढेगा? वह सामान्य रूप से सुनने वाले बच्चों के स्कूल में कैसे पढ पाएगा?
  20. हम अभिभावकों की भूमिका क्या हैं? हम कैसे मदद कर सकते हैं?
  21. बच्चों से बात करने का क्या उपयोग हैं? वह मेरी आवाज परं कोई प्रतिक्रिया नहीं करता हैं/करती हैं, और मैं क्या कहता हूँ, न समझता हैं / न समझती हैं।
  22. क्या मेरा श्रवण-विकलांग बच्चा सामान्य जीवन जी सकेगा
  23. क्या श्रवण-विकलांग व्यक्तियों को रोजगार/नौकरी मिलेगी?
  24. क्या श्रवण-विकलांग व्याक्ति विवाह कर सकते हैं?
  25. क्या श्रवण-विकलांग व्याक्तयों के बच्चे भी श्रवण-विकलांग होगे?

प्रश्न: क्या दवाइयों से श्रवण-दोष का इलाज किया जा सकता हैं?

उत्तर:यहं श्रवण-दोष के कारणों पर निर्भर करता हैं। सामान्य रूप से, कान के मय एवं बाहरी समस्याओं का निदान, शल्य चिकित्सा एवं दवाइयों द्वारा किया जा सकता हैं। कान की अन्दरूनी एवं तंत्रिका-तंत्र की खराबी का इलाज नहीं किया जा सकता। इन परिस्थितियों में, श्रवण-यंत्र सबसे अच्छा उपाय हैं।

प्रश्न: क्या मेरा बच्चा श्रवण-यंत्र की सहायता से कभी सुन पाएगा?

उत्तर:श्रवण-यंत्र उसे उन आवाजों को सुनने में मदद करेंगा, जो वह नहीं सुन पाता/पाती हैं। बच्चे वनि की प्रतिक्रिया सीखने में समय लगाते हैं। छोsटें बच्चे जिन्हें प्रोफाउन्ड हिंयरिंग लॉस ' हैं, वे छह से आठ महीने में वनि के प्रति प्रतिक्रिया समझने में लगा सकते हैं। एक बच्चा कितना सुनेगा, यहं इस बात पर निर्भर करता हैं कि श्रवण-क्षय कितना हैं एवं उसे श्रवण-यंत्र से कितनी सहायता मिलती है। अनुभव यह बताता हैं कि अगर बच्चों को श्रवण-यंत्र छह महीने के पहले लगाया जाए, तो उनकी सुनने की एवं बोल-चाल की भाषा द्वारा अभिव्यक्त करने की क्षमता सामान्य रूप से विकसित होती हैं।

प्रश्न: श्रवण-यंत्र किस तरह सहायक होगे?

उत्तर:श्रवण-यंत्र आवाज को ऍम्प्लीफाइ करते हैं एवं उसे कान में भेजते हैं, ताकि बच्चा अपनी अंतविर्हिंत सुनने की क्षमता का प्रयोग कर सकता हैं। श्रवण-यंत्र की मदद से श्रवण-दोष खत्म नहीं हो जाता, नही इससे सामान्य सुनने की प्रक्रिया बहाल हो जाती हैं। इसलिए श्रवण-यंत्र पहनने के बाद भी ऐसा हो सकता हैं कि बच्चा सामान्य रूप से बात-चीत की प्रक्रिया में भाग न ले पाए या वातावरंण की आवाजों के प्रति सामान्य पक्रिया न करं पाए। हालाकि बच्चा इटेसिव ऑडिटरी ट्रेंनिंग ' से सुधारंता हैं। ऑडिंयॉलाजिस्ट का उद्देश्य ऐसा श्रवण-यंत्र स्थापित करना अपेक्षित हैं, जिससे कि सभी प्रकार की आवाजों को सुनने में अाकिााकि मदद मिल सके, विशेषत: बोल-चाल के समय। हालाकि, प्रत्यक्ष रूप में यह सभी परिस्थितियों में संभव नहीं होता। कुछ बच्चों को किसी भी श्रवण-यंत्र से इच्छित फायदा नहीं मिल पाता, इसलिए वे पूरी तरह जीवन के दैंनिक कार्यों के लिए श्रवण यंत्र पर निर्भर रहते हैं। ऐसी परिस्थतियों में श्रवण-यंत्र के साथ-साथ बोली पढने की भी सीख दी जानी लाहिए। अगर लाभ नगण्य हो तो 'कॉकलिययरं इम्प्लान्टं ' 'Cochlear Implant'के बारें में बाद में निर्णय लिया जा सकता हैं। यह बहुत ही महत्त्वपूर्ण हैं कि बच्चे को श्रवण प्रशिक्षण ' विशेष रूप से मार्गदर्शन के छांरां दी जाए, क्योंकि जिन बच्चों को श्रवण-यंत्र से मदद मिलती हैं, वे भी आवाजों को सुनने के प्रति लापरंवाहं हो सकते हैं, अगरं उन्हें ठंीक ढंग से सुनने ' में प्रशिक्षित न किया जाए। प्रशिक्षण एक निरतर चलने वाली प्रक्रिया हैं। बच्चे की प्रगति बहुत से कारणों पर निर्भर करती हैं, जैसे कि स्वय बच्चे पर, श्रवण-दोष के प्रकार परं, श्रवण-यंत्र के उपयोग प, रोक-थाम की शुरुआत कितनी जलदी की गयी, नियमित प्रशिक्षण कार्यक्रम और उससे भी ज्यादा बच्चे को अभिभावकों से मिलने वाली सहायता । एक बच्चे को तब तक प्रशिक्षण की जरूरत पडती हैं, जब तक उसकी बोली, भाषा एवं अययन की क्षमता उसकी उम्र के अनुपात में ठीक न हो जाए। बहुत इस बात की इच्छा की जाती हैं कि श्रवण-विकलांग बच्चे को उस स्तर तक प्रशिक्षित किया जाए कि उसकी बोली, भाषा एवं सुनने की क्षमता उसके दूसरें सामान्य सुनने वाले बच्चों के स्तर तक या उससे अधिक पहुँच जाए। अगरं ठोस कोशिश की जाए तो यह संभव हैं ।

प्रश्न: बच्चे को श्रवण-यंत्र कितने दिनों तक पहनना पडेगा?

उत्तर: बच्चे को श्रवण-यंत्र पूरी जिंदगी भरं पहनना पडेगा। श्रवण-यंत्र श्रवण-दोष का उपलार नहीं करता हैं, इसलिए जिस प्रकारं हंम चश्मा पहनते हैं, उसी प्रकार श्रवण-यंत्र बच्चे को जिंदगी भर पहनना पडंता हैं।

प्रश्न: श्रवण-यंत्र लगाने के बाद, कितने बच्चे सामान्य रूप से अवरोध मुक्त गति से बोल पाते हैं?

उत्तर:जिन बच्चों को श्रवण-दोष हैं, वे शुरुआती स्थिति में ठीक प्रकार से बोल न पाएँ, लेकिन उनकी बोली को 'स्पीच थेरैंपी' की मदद से बेहतर बनाया जा सकता हैं। यह इस बात पर बहुत निर्भर करता हैं कि बच्चा श्रवण-यंत्र लगातार पहनता हैं कि नहीं और उसे बचपन में नियमित प्रशिक्षण दिया गया हैं कि नहीं। बच्चे के लिए यह सीखना महत्त्वपूर्ण हैं कि वह अपनी अंतनिर्हिंत सुनने की क्षमता का अधिकाधिक उपयोग करें, क्योंकि सुनना बोली विकसित करने का सबसे प्रभावी माध्यम हैं। यह देंखना भी महत्त्वपूर्ण हैं कि वह बोलने की गलत आदतें न विकसित करें।

जानकारी:

http://bharat.gov.in, भारतीय राष्‍ट्रीय पोर्टल (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं)

अंतिम अद्यतन दिनांक : २२/०३/२०१७