सामान्यत: पूछें जानेवाले प्रश्न

प्रश्न: मेरा बच्चा श्रवण-यंत्र पहनने से इन्कार करता हैं, वह उसे बहुत थोडें समय के लिए पहनता हैं/पहनती हैं। क्यों?

उत्तर: एक बच्चे को श्रवण-यंत्र के साथ परस्पर सामजस्य बनाने में समय लगता हैं बच्चे बहुत जिज्ञासु होते हैं और श्रवण-यंत्र को छूना एवं देखना चाहते हैं। यहं अभिभावकों को लितित बना देंता हैं कि श्रवण-यंत्र खराब न हो जाए। बच्चे को डाँटने के बजाए, यह निश्चित करिए कि वह खिलौनों से हमेशा खेलता रहें/खेलती रहें, जब वह श्रवण-यंत्र पहनता हैं/पहनती हैं। उसके साथ खेलों एवं उसका कान आवाजों के प्रति आकषिर्त करो अगर उसे पहनने के कुछ समय बाद, वह परेशान हो जाता हैं/जाती हैं, तो उसे कुछ समय के लिए निकाल दो। बाद में उसे फिर से पहना दो और वह बिना ना -नुकर के उसे पहनता हैं/पहनती हैं, तो उसकी प्रशसा करे।
कुछ परिंस्थितियों में, कुछ दूसरें कारण भी हो सकते हैं, जिनकी वजह से बच्चा श्रवण-यंत्र नहीं पहंनता हैं/पहनती हैं:
(क) मोल्ड ठीक से कान में फिट न हुआ हो, कान के मोल्ड की ट्यूब लंबी या छोटी हो सकती हैं या उसे कान में दर्दं होता हो। इन संभावनाओं को नजर-अंदाज न करें। अगर आपको कान बहता हुआ दिखाई दें या फूला हुआ दिखाई दें, तुरत चिकित्सक की सलाह लीजिए, विशेषकर इएनटी विशेषज्ञ की। (ख) श्रवण-यंत्र असुविधाजनक रूप से तेज हो सकता हैं। इस संभावना की जाँच करें कि बच्चा तेज आवाज वाले श्रवण-यंत्र की वजहं से परेंशानी तो नहीं महसूस करता हैं/करती हैं। अगर आपको महसूस होता हैं कि बच्चा तेज आवाज से परेंशानी महसूस करता हैं/करती हैं, तो तुरत 'ऑडियोलॉजिस्ट ' की सलाह लीजिए। (ग) शरीर स्तर के श्रवण-यंत्रों में (Body level aids), --- ठीक से फिट न होता हो। शायद श्रवण-यंत्र का ध्वनि नियंत्रक अधिक हो (घ) बच्चे को श्रवण-यंत्र से शायद भय हो या वह शर्माता हो/शर्माती हो। अभिभावकों को सहायता करंने वाली एवं मदद करंने वाली भूमिका अदा करंनी लाहिंए एवं धीरेंधीरें श्रवण-यंत्र के उपयोग की अवधि बढांनी चाहिंए। आप सिर्फ 'इअर-मोछड ' लगवाकर बिना श्रवण-यंत्र के अभ्यास भी करवा सकते हैं। अपको मोल्ड लगाते समय सवधानी बरतनी चाहिए एवं नरमाई से लगाना लाहिए। अगर मोल्ड लगाते समय शारीरिक दर्दं होगा, तो बच्चा स्वाभाविक रूंप से भयभीत हो जाएगा/जाएगी। (च) बच्चा श्रवण-यंत्र का उपयोग आपको नियंत्रित करने के लिए करंता हो/करंती हो। यह संभव हैं अगर बच्चा समझ जाता हैं/जाती हैं कि आप श्रवण-यंत्र के बारें में चितित रहते हैं। अगर वह श्रवण-यंत्र निकाल देंता हैं/ देंती हैं, तो तुरत चिंतित न हों। शांत रहो आपको उसके श्रवण-यंत्र के उपयोग से संबंधित नुकसानी को व्यावहारिक कौशल द्वारा कम करंना होगा।

प्रश्न: क्या मेरां बच्चा श्रवण-यंत्र पहंनने के बाद अच्छी तरह से बोल एवं सुन सकेगा /सकेगी?

उत्तर:श्रवण-विकलांग बच्चे, अगर उन्हें नियमित रूप से प्रशिक्षित किया जाए एवं मौका दिया जाए, तो बोलना शुरू कर सकेंगे । एक बच्चा जो कि सामान्य रप से सुनता हैं, एक या डेढ साल की उम्र में बोलना शुरू कर देंता हैं, हालाकि सुनना तो वह जन्म से ही शुरू कर चुका होता हैं (वास्तव में माँ के गर्भ से ही)। एक बच्चा जिसे कि प्रCफाऊड श्रवण-विकलांगता हैं, श्रवण-यंत्र का उपयोग करने के बाद सुनना शुरू करंता हैं। इस अवस्था में उसकी सुनने की उम्र शून्य हैं, हालाकि वह उम्र में बडा हैं/बडी हैं। इस अवस्था से वह बोली एवं भाषा सीखने की प्रक्रिया शुरू करता हैं। कयूँकि वह हमसे भिन्न रूप से सुनता हैं/सुनती हैं, प्रक्रिया शुरुआत में धीमी हो सकती हैं एवं श्रवण-यंत्र के उपयोग की वजह से कठिन भी नहीं हैं कि इस प्रकार के बच्चे को बोलने की शुरुआत करने में डेंढं वर्ष तक लग सकता हैं। इस अवधिमें बोल-चाल की प्रगति बहुत से कारणों पर निर्भर करती हैं, जैसे कि : किस उम्र में श्रवण-यंत्र लगाया गया हैं । (जितनी जल्दी हो उतना अच्छ) श्रवण-यंत्र का अधिकाधिक उपयोग, यंत्र की उचित देंखभाल । अंतनिर्हिंत सुनने की पूर्ण क्षमता का उपयोग करंने के लिए 'श्रवण प्रशिक्षण ' क्योंकि सुनने वाला एवं भाषा विकसित करने का सबसे अच्छां माध्यम हैं। बच्चे की बुद्घिंमत्ता । बच्चे एवं बच्चे के परिंवारं का श्रवण-यंत्र के प्रति व्यवहांरं रोक-थाम कार्यक्रमों में नियमित सभागिता अभिभावकों द्वारा बच्चे को दिया गया मार्गदर्शन ताकि घर पर भी प्रशिक्षण जारी रंहें। बच्चे की अन्य संबंधित समस्याएँ जैसे कि दृष्ट विकलांगता, मानसिक विकलांगता आदि। (श्रवण-विकलांगता के अलावा) सामान्य रूप से, जब बच्चा बोलना शुरू कता हैं, तो उसे प्रोत्साहिंत किया जाना लाहिंए। उसकी बोली के बारें में निर्णायक मत बनिए। स्पष्टता थोडे वर्षो के बाद अपने आप आ जाएगी एवं उसे स्पीच थेरैपी' की प्रक्रिया का लाभ मिलेगा।

प्रश्न: क्या मेरा बच्चा जब वह बोलना शुरू कर देंगा /देगी, तो श्रवण-यंत्र पहनना बंद कर सकता हैं?

उत्तर:नहीं, वह इसे पहंनना बंद नहीं कर सकता हैं/सकती हैं। क्या एक सामान्य रूप से सुनने वाला बच्चा जब बोलना शुरू क देंता हैं/देंती हैं, तो क्या व अपने कान बंद क देंता हैं/देंती हैं। क्या हम सब सुनने का आनंद नहीं उठाते? तो एक श्रवण-विकलांग बच्चा आवाज का आनंद उठाने से क्यो वंचित हें?

प्रश्न: मेरा बच्चा बहुत ही छोटा हैं। क्या हमें उसके थोडे बडे होने का इंतजार करना चाहिए, ताकि वह श्रवण-यंत्र पहन सके?

उत्तर:नहीं, बिछंकुल नहीं। वास्तव में जितना छोटा होगा, उतना अच्छा क्योंकि वह छोटी उम्र से ही आवाजों को सुनना शुरू करेंगा एवं अपना कीमती समय कम गँवा एगा /गᄋवा एगी। वह श्रवण-यंत्र के साथ ही बडा होगा एवं उसे आसानी से स्वीकार करेंगा और महत्त्वपूर्ण बात यह हैं कि व अपनी अंतनिर्हिंत सुनने की क्षमता का उपयोग करंना सीख जाएगा एवं अच्छी बोली एवं भाषा विकसित कर पाएगा, उस परिस्थिति की तुलना में यदि वहं श्रवण-यंत्र बडी उम्र से पहनना शुरू करें। हांलाँकि, छाेटें बच्चों के साथ श्रवण-यंत्र का उपयोग करते समय समजन करना पड सकती हैं। यहं समय-समय परं किए गए प्रगति के परीक्षण से मूल्यांकन से किया जा सकता हैं। एक छाेटें बच्चे को सुनने एवं श्रवण-यंत्र का परीक्षण छह महीनों में कम से कम एक बार अवश्य लेना लाहिए। अभिभावक के रूंप में आपको अपने बच्चे को श्रवण-यंत्र का अधिकाधिक उपयोग करने के लिए प्रोत्साहिंत करना लाहिए। सावधान रहिए क्योंकि बच्चे अक्सर वस्तुएँ मुँह में निगलते रहते हैं या पटकते रहते हैं। रोक-थाम कार्यक्रम में सहभागी हो जाइए। यह आपको श्रवण-यंत्र की देंखभाल एवं उपयोग से संबंधित समस्याओं के बारें में अवगत करांएगा एवं आप छोटें बच्चों पर उसे आजमा पाएँगे।

प्रश्न: मेरा बच्चा किसी भी आवाज परं कोई भी यान नहीं देंता, क्या वह मुख्य रूप से श्रवण-यंत्र से सुनता हैं/सुनती हैं?

उत्तर:यह एक सामान्य समस्या हैं। एक उदाहरण देंखिए - समझिए कि आप एक महत्त्वपूर्ण काम कर रें हैं, आप इतना ध्यान केन्द्रित करते हैं कि, बहुधा दूसरा क्या कता हैं या आपको बुलाता हैं, उसकी ओर आप ध्यान नहीं देंते हैं। लेकिन समझिए कि आप किसी की प्रतीक्षा कर रंहें हैं, तो अवस आने पर आप प्रतिक्रिया करेंगे एवं जब समय आएगा, तो प्रत्युत्त भी देंगे। इसलिए कि आवाज आप के लिए महत्त्वपूर्ण हैं। एक बच्चा जो कि श्रवण-विकलांग हैं जिसने अभी-अभी श्रवण-यंत्र के उपयोग की शुरुआत की हैं, अभी-अभी 'आवाज ' एवं 'सुनना ' उसके लिए इतना महंत्त्वपूर्ण नहीं हैं इसलिए वहं बहुंधा ठंीक से उत्तर नहीं देंता हैं/देंती हैं। कुछ समय व (मौखिक हांव-भाव के छारा, बहुत शात होकर, आवाज बनाकरं या निकाल कर) जब आप कोई आवाज करेंगे तो वहं तुरंन्त प्रतिक्रिया स्वरुंप आपकी ओरं मुडेंगा, लेकिन आप उसे नोट करना भूल जाते होगे क्योंकि आप आशा करते हैं ।इन दोनों स्थितियों में यह सूलित करता हैं कि क्रमबद्घं रूप से सुनने की क्षमता बढाने के लिए आडिटरी प्रशिक्षण की जरूरत हैं। यहं एक लंबी प्रक्रिया हैं, जब आप रोक-थाम कार्यक्रम में नियमित रूप से सहंभागी होगे, तब समझ जाएगे। संक्षेप में, आपको श्रवण-यंत्र के अधिकाधिक उपयोग को प्रोत्साहित करना चाहिए एवं सुनना एक सुखद अनुभव बनाना चाहिंए। खेल के अंदर इसे शामिल करिए (उसका यान आने वाली आवाजों की ओर खीचिए। लोगों का संभाषण सुनने के लिए उसे प्रोत्साहिंत कीजिए) मुक्त कठ से प्रशंसा करिए, जब वह ठीक से प्रत्युत्तर देंता हैं/देंती हैं। आवाज के प्रति जिज्ञासु वृत्ति को प्रोत्साहिंत करिए। सीखने के प्रति सकारांत्मक भाव पैदा करना बहुत जरुरी हैं।

प्रश्न: हमें क्यों एक भाषा में बात करंनी चाहिंए?

उत्तर:एक बच्चा अपने आस-पास के वातावरण में बोली जाने वाली भाषा को सुनक उसे बोलना सीखता हैं। श्रवण-विकलांग बच्चे के लिए सुनने में कठिंनाई के कारंण भाषा ग्रहंण करंना एक धीमी प्रक्रिया होती हैं। अगर हम शुरुआत में ही एक से अधिक भाषा का प्रयोग करेंगे, तो बच्चा शब्द एवं व्याकरण में भ्रमित हो जाएगा एवं उसकी प्रगति रक जाएगी। चूँकि यह बहुत जरूरी हैं कि हम बच्चे के साथ ज्यादा बातें करें, पहली भाषा जो सभी वयस्क मुक्त कठ से घर में बोल सकते हें, वही होनी लाहिए। जब बच्चा पहली भाषा पर्याप्त रूप से ग्रहण कर चुका हो, तब दूसरी भाषा से उसे परिंचित करांना लाहिए।

प्रश्न: क्या जब हंम बाहंरं जाते हैं, तो मेरें बच्चे को श्रवण-यंत्र पहंनना चाहिए?

उत्तर:हाँ, उसे जरूर पहनना चाहिए। वास्तविकत: श्रवण-यंत्र जब तक जागते हो, तब तक पहनना चाहिए, सिवाय स्नान करते समय। आपके बच्चे को वातावरण की सभी आवाजों से परिचित कराना चाहिए। बाहर की दुनिया में सीखने के बहुत से मौके हैं, जो कि आपका बच्चा चूक सकता हैं, अगरं वहं अपना श्रवण-यंत्र नहीं पहंनता हैं/पहनती हैं।

जानकारी:

http://bharat.gov.in, भारतीय राष्‍ट्रीय पोर्टल (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं)

अंतिम अद्यतन दिनांक: २७/०७/२०१२