सामान्यत: पूछें जानेवाले प्रश्न

प्रश्न: कभी-कभी मैं क्रोधित हो जाता हूँ / हो जाती हूँ, जब मेरां बच्चा सहयोग नहीं देता। मुझे क्या करना चाहिए?

उत्तर:हम सभी कभी-कभी क्रोधि त होते हैं, लेकिन हमें यह याद रखना लाहए कि इससे कोई काम बनता नहीं। क्रोध हमेशा असंतुष्ट के कारण पैदा होता हैं, जो कि अधिक अपेक्षा की वजह से पैदा हो सकता हैं। अगरं आपका बच्चा सहंयोग नहीं करंता हैं, तो यहं संभव हैं कि उसे इस कार्य में आनंद न मिलता हो या वहं यहं न समझ पाता हो कि आप उससे क्या करंवाना चाहंते हैं। यहं जरूरी हैं कि आप अपने बच्चे को कोई भी कार्य करने के लिए बाय न करें। कार्यों का चुनाव बच्चे की उम्र एवं क्षमता के अनुपात में करना चाहिए। अपने उद्देंश्य की पूर्तिं के लिए अन्य तरीकों से देंखें । जब बच्चे को संभालना कठिन हो तो शिक्षक थेरेंपिस्ट से मदद माँगे ।

प्रश्न: मेरें कस्बे के नजदीक कौन से केन्द्र उपलब्ध हैं?

उत्तर:हमारें (मेल/ईमेल) पते परं हंमें लिखिए औरं अपने बच्चे की समस्या के बारें में विस्तारं से बताइए एवं अपना पता एवं ईमेल भेजिए। हंम आपको उन केन्द्रो के नाम के बारें मे बताएँगे (भारत के अन्दर) जो आपके नजदीक होंगे एवं जहाँ से आप मदद लें सकते हैं। यहं जरूरी हैं कि आपके बच्चे की जल्द से जल्द मदद की जाए। आप इएनटी स्पेशलिस्टं (कान, नाक, गला विशेषझ), की भी मदद ले सकते हैं।

प्रश्न: आप मुझे श्रवण-यंत्र क्यों नहीं प्रदान कर रहें हैं? लोग क्या कहते हैं, यहं सुनने में मुझे कठिनाई होती हैं?

उत्तर:बहुतसी परिस्थितियों में श्रवण-यंत्र की जररत नहीं होती हैं या श्रवण-यंत्र की जरूरत के हिसाब से लाभ नहीं पहुँचा पाते हैं। यहं भी हो सकता हैं कि श्रवण-यंत्र पहनने से संवाद की स्थिति में औ कठिनाई पैदा हो जाए। इन परिस्थितियों में ऑडिंयोलॉजिस्ट श्रवण-यंत्र न पहनने की सलाह दें ।

प्रश्न: हमें क्षेत्रीय केन्द्रं में कितनी बार जाना पडेंगा?

उत्तर:आपको रोकथाम एवं परीक्षण जाँल कार्यक्रमों में नियमित हाजरी देंनी लाहिंए, जबतक कि वह पूरें न हो जाएँ।

प्रश्न: जब मैं उसे उसके नाम से पुकारंता हूँ, तो वहं मुड करं क्यों नहीं देंखता?

उत्तर:उसे इसका आभास होने के लिए समय लगेगा कि उसे आवाज के प्रति संवेदना प्रतिक्रिया व्यक्त करंनी चाहिंए। उसे आवाज को अपने नाम के साथ संलग्न करना चाहिए, एवं समझना चाहिंए कि उसे बुलाया जा रहा हैं। य समय लेता हैं क्योंकि इसमे विभिन्न आवाजों के प्रति भेद करंना पडता हैं एवं एक आवाज को पचानना पता हैं। (स्वयं का नाम) यही कारण हैं कि वहं पीछें मुडकर नहीं देंखता /देंखती हैं, अग आप उसे उसके नाम से बुलाते हैं।

प्रश्न: 'कॉकलियर इप्लान्ट '(Cochlear Implant) क्या हैं?

उत्तर:कॉकलियरं इम्प्लान्ट एक प्रोस्थेरिंक डिंवाइस हैं, जो कि उन व्यक्तियों के लिए हैं जिन्हें तीव्र मात्रा में संवेदी श्रवण दोष हैं, और जिन्हें श्रवण-यंत्र से पर्याप्त मात्रा में सहायता नहीं मिलती हैं। यहं इम्प्लान्टं नर्व सेल्स को प्रत्यक्ष रूंप से उत्तेजित कता हैं। में कॉकलिया (इलेक्ट्रिक सिग्नल के द्वारा, जब कि श्रवण-यंत्र कान में एम्प्लीफाइ आवाज भेजता हैं। इस इम्प्लान्ट को शच्च-चिकित्सा द्वारा स्थापित करंना पडता हैं। एक बच्चा कॉकलियर इम्प्लान्ट के लिए सही पात्र हैं कि नहीं इसका निर्णय करंने के पहले विस्तृत परीक्षण जरूरी हैं। इस इम्प्लाट से श्रवण-दोष का इलाज नहीं होता। बच्चे को एक यंत्र पहंनना पडता हैं, जC कि बाहर से दिखता हैं। उसे बार-बार बोली एवं भाषा के विकास के लिए रोक-थाम के कार्यक्रमों में भी सहंभागी होगा पडेंगा।

प्रश्न: मेरां बच्चा कहाँ पढेंगा? वह सामान्य रप से सुनने वाले बच्चों के स्कूल में कैसे पढं पाएगा?

उत्तर:हर श्रवण विकलांग बच्चे की शिक्षा तक पहुँंच होनी चाहिंए एवं यहं उसका मौलिक अधिकारं हैं। रोजगार बच्चे की व्यक्तिगत क्षमता पर निर्भर करेंगा, जो कि पीक्षण द्वार निर्धारत की जाती हैं। एक विशेष शिक्षक य बता सकता हैं कि बच्चे को विशेष विद्यालय में जाना चाहिंए या व सामान्य विद्यालय में प्रवेश ले सकता हैं। यह निर्णय महंत्वपूर्ण हैं क्योंकि सी स्कूल का चुनाव यह निश्चित करेंगा कि बच्चा भविष्य में किस प्रकार प्रगति करेंगा? बहुंत से श्रवण-विकलांग बच्चे जिनकी भाषा की क्षमता अच्छंी हैं, सामान्य विद्यालयों में जाते हैं एवं अच्छा प्रदर्शन करते हैं। हांलाकिं अगरं बच्चे को सामान्य पाठंक्रम के साथ कठिनाई आ रही हैं, तो उसे विशेष स्कूल से फायदा उठने की कोशिश करनी चाहिंए जहाँ कि शिक्षकों को ऐसे बच्चों को संभालने में विशेष रूप से प्रशिक्षित किया जाता हैं या फि सामान्य स्कूल में ही पढाई जारी रंखनी चाहिंए एवं समय-समय परं विशेष शिक्षक की मदद लेते रनी चाहए। इस सन्दर्भ में अधिक विवण हेंतु शैक्षणिक सेवाऐं को विस्तारं से देंखिए।

प्रश्न: हम अभिभावकों की क्या भूमिका हैं? हम कैसे मदद कर सकते हैं?

उत्तर:हम अभिभावकों कों रोक-थाम कार्यक्रम में सभागी के रूप में देंखते हैं। अभिभावक ी बच्चों के प्रथम शिक्षक होते हैं। अभिभावकों एवं बच्चों के बील भावनात्मक संबंध बहुंत ही गहरा होता हैं एवं उसके बनाये रखा जाना चाहिंए । श्रवण-विकलांग बच्चों के अभिभावकों की अपने बच्चों की जरूरतों को समझने की कोशिश कनी लाहिंए, जब बच्चा ठीक से न बोल पाता /पाती हो। यह संबंधसीखने की परिस्थितियों में बहुत मदद करता हैं। अभिभावकों का उनके साथ समय बिताना बच्चे बहुत पसंद करंते हैं एवं वे अभिभावकों को प्रसन्न करने की हर संभव कोशिश करंते हैं। अभिभावक श्रवण-यंत्र की स्वीकृति के कठिंन समय में बोली एवं भाषा परीक्षण एवं आडिंटंरी परीक्षण करने मे बच्चों की बहुत मदद जैसा कि सभी जानते हैं, बच्चा अािकाािक समय घर पर ही व्यतीत कता हैं, तब भी जब वह किसी रोक-थाम केन्द्र में जाता हो। यह महत्वपूर्ण हैं कि वह शिक्षक /थेरैंपिस्ट द्वारा कह गया हैं अभिभावक को रोक-थाम से संबंधित कार्य घर पर लेना लाहिंए । अभिभावकों की रोक-थाम के कार्यक्रमों को अच्छी तर देखना चाहिए एवं वैसी ही गतिविधियाँ घर पर भी करने की कोशिश करनी चाहिए।
कार्यक्रमों से संबंधित एक डायरी रंखिए एवं अपने थेरैंपिस्ट की गतिविधियों के बारें में नियमित सलाहं लीजिए कि वे ठीक थीं या नहीं।

प्रश्न: बच्चे से बात करने का क्या उपयोग हैं? वह मेरी आवाज का कोई प्रत्युत्तर नहीं देता /देती है, न ही मैं क्या कहता हूँ, वह समझता /समझती हैं?

उत्तर:यह एक बार-बार पूछा जानेवाला प्रश्न हैं विशेषत: जब व्यावसायिक इस बात पर जोर देते हैं कि अभिभावकों को अपने बच्चों से बातें करंनी चाहिए। दुंर्भाग्यवश यह होता हैं कि जैसे अभिभावकों को अपने बच्चे के श्रवण-विकलांग होने का पता चलता हैं, उनकी उनसे बात-चीत की प्रक्रिया कम होने लगती हैं। यहं स्वाभाविक ही हैं कि आपको इसे बदलने के लिए म लेना पडेंगा। यहं कठिंन लगता हैं कि आप बच्चे से बात करते रंहें, जब की बच्चा कुछ समझ नीं पा रहा हैं। आपको लगता हैं कि आप के पास बात-चीत के समस्त मुद्दें खत्म होते जा रहें हैं। पर यह याद रखिए कि अगर आप उससे बाते करते हैं, तो वह समय बीतने पर बोलना सीख जाएगा। हालाकि उसे पहले भाषा को समझना शुरू करना होगा, इसमे पहले कि भाषा बोलने में प्रगति दिखा पाए। वह इसमें रूचि दिखाएगा/दिखायेगी, अगर आप मुँह के सामने से बात-चीत करेंगे, तो वह आपके मुँह के हाव-भाव से बहुत कुछ समझ पाएगा /पाएगी। उससे यहं बात करिए कि वह क्या कर रहा हैं या जैसे-जैसे कुछ हो रहा हैं, वह क्या कर रहा हैं। यह उसे आगे के लिए मदद देंगा। खेलों का, चित्रों का, फोटो का या किसी भी वस्तु का जिसमें आपका बच्चा रूचि लेता हो, उपयोग कीजिए। बच्चे माँ की नकल करने में आनंद महसूस करते हैं इसलिए आपके दैंनिक कार्य जैसे कि चपाती बनाना, सब्जियाँ काटना, कपडें धोना एवं तह करना। आपके बच्चे से संवाद स्थापित करने का उत्तम समय हैं एवं आपके बच्चे को बोली एवं भाषा सीखने में सहांयक होता हैं।
बहुधा अभिभावकों को ये गतिविधियाँ नापसंद लगती हैं क्योंकि उनकी ऐसी इच्छां होती हैं कि दिन भरं की गतिविधि के अंत में बच्चा कोई प्रगति दिखाए या कुछं बोले। यहं वास्तविक नहीं हैं। सिखने जैसे विशाल समुद् में हर दिन की गतिविधियाँ बूँद के समान हैं। इसलिए धैर्य जरूरी हैं। याद रंखिए कि यहं आपके बच्चे के लिए भी बरांबरं क़ठिंन हैं। दिन के अंत में आपका बच्चा समझ नहीं पाता कि आप उससे नाखुश क्यों हैं? इसलिए अपने बच्चे से बातें करिंए।

प्रश्न: क्या मेरां श्रवण-विकलांग बच्चा सामान्य जीवन जी सकेगा?

उत्तर:वहं सामान्य जीवन जी सकेगा /सकेगी। उसे श्रवण-यंत्र का उपयोग करंना पडेंगा या कोई सहांयक यंत्र का उपयोग करंना पडेंगा जो कि उसे आत्म-निर्भरं जीवन जीने के लिए सहांयक होगा। वहं सरंकारं से विकलांग व्यक्तियों को मिलनेवाली सुविधाएँ एवं सहांयतों का भी लाभ ले सकेंगा /सकेगी।

प्रश्न: क्या श्रवण -विकलांग व्यक्तियों को रोजगार मिलेगा?

उत्तर:एक श्रवण-विकलांग व्यक्ति को किसी भी व्यवसाय के लिए प्रशिक्षित किया जा सकता हैं, यदि उसमें उसके प्रति रूझान एवं कला हैं। बचपन में शुरुआत से प्रशिक्षण ही भाषा की अच्छंी क्षमता के लिए जरूरी हैं। यह व्यक्ति को उच्च शिक्षा तक लें जाने में भी मददगारं होता हैं। बहुंत से विशेष व्यावसायिक प्रशिक्षण एवं रोजगार केन्द्रं देंश में हैं। विवरण हेंतु व्यवसायिक प्रशिक्षण एवं रोजगार के शीर्ष के अधीन सन्दर्भ लें ।

प्रश्न: क्या श्रवण-विकलांग व्यक्ति विवाह कर सकते हैं?

उत्तर:हाँ, एक श्रवण-विकलांग व्यक्ति विवाह कर सामान्य जीवन जी सकता हैं। हालाकि ऐसी भी स्थितियाँ हैं कि जहाँ श्रवण-दोष आनुवंशिक या जन्म-जात हैं। उन परिस्थितियों में वयस्क विकलांग व्यक्तियों को विवाहं के पहंले आनुवंशिक सलाहं की जरूंरंत हैं।

प्रश्न: क्या श्रवण -विकलांग व्यक्ति के बच्चे भी श्रवण -विकलांग होंगे?

उत्तर:नहीं, यदि श्रवण-विकलांगता आनुवंशिक कारण से न हो। अगर परिवार में श्रवण-विकलांगता का इतिहास हैं या व्यक्ति को सिंड्रोम हैं (जैसे कि वार्डंनबर्गस सिन्ड्रोम), तो आनुवशिक सला की जरूंरंत हैं, ताकि गर्भावस्था में एवंतो की गुंजाइश न रहें।

जानकारी:

http://bharat.gov.in, भारतीय राष्‍ट्रीय पोर्टल (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं)

अंतिम अद्यतन दिनांक: २७/०७/२०१२