माता पिता को दिशा-निर्देश तथा उनका योगदान

परिवार का योगदान

पूरे इतिहास तथा संस्कृति के दौरान परिवार अस्तित्व बनाये रखने के लिए प्राथमिक एजेन्सी रही हैं। यद्यपि परिवार का गठन भिन्न भिन्न रहा हैं, किन्तु उनका कार्य विश्र्व जमीन रहा हैं। सभी संस्कृतियों में माता-पिता या पालको ने अपने समाज या समूह द्वारा अपेक्षित सामाजिक, आर्थिक तथा राजनैतिक शक्तियों द्वारा आवश्यक अपनी क्षमताओं को अपनी सन्तान तक पहुचाने का
उत्तरदायित्व निभाया हैं। परिवार का संभोजन माता पिता द्वारा होता हैं किन्तु इसमें सहोदर, दादा दादी, नाना नानी, चाचाओं तथा चाचियों तथा अन्य विस्तारित परिवार भी समाहित होता हैं।
अतः परिवारों के मुख्य उत्तरदायित्वों को निम्न रूप से सूचीबध्द किया जा सकता हैं :

  1. आर्थिक उत्तरदायित्व - आय कमाना तथा जीवनयापन लागतों तथा संगत भुगतानों हेंतु वित्तीय अवलम्ब को उपलब्ध कराना।
  2. घरेलु तथा स्वास्थ्य देखरेख उत्तरदायित्व - भोजन, वस्त्र, स्वास्थ्य तथा चिकित्सीय देखभाल तथा सुरंक्षा।
  3. मनोरजनात्मक उत्तरदायित्व - आरामदायक पर्यावरण तथा गतिविधिया।
  4. परिवार के प्रत्येक सदस्य में अपनेपन की भावना का संबर्धन करने हेंतु "स्व " की पहेचान करने का उत्तरदायित्व।
  5. प्यार बाँटने, देखभाल करने, भावनात्मक एकता तथा सहचारिता हेंतु स्नेहपूर्ण उत्तरदायित्व।
  6. सामाजिक कुशलताओं का विकास करने तथा परस्पर व्यक्तिगत सम्बन्धों को बढाने के लिए समाजीकरण का उत्तरदायित्व।
  7. विद्या अध्ययन एवम्‌ आर्जिविकार और चयन एवम्‌ तैयारी हेतु सहायता तथा प्रष्रय प्रदान करने हेतु शैक्षणिक तथा व्यावसायिक उत्तरदायित्व।

श्रवण क्षीणता वाले बच्चों के माता पिता हेतु निर्दश विशेषतया श्रवण क्षीणता वाले बच्चे हेतु

  • अपने बच्चे को जागते हुए पूरें समय के लिए श्रवण एड पहने रखने के लिए प्रोत्साहित करें।
  • बच्चे तब तक एक ही भाषा तक सीमित रखिये जब तक वह प्राथमिक भाषा का विकास नहीं कर लेता। दूसरी भाषा को समुचित समय पर आरम्भ कि या जा सकता हैं।
  • बोलते समय बच्चे के सामने रहें।
  • बच्चे के साथ हर समय सहज ठग से बातचीत करें तथा उसे स्वय को अभिव्यक्त करने का पर्याप्त समय व अवसर दें।
  • बच्चे से इस आधार पर बातचीत करने से न बचिये कि वह नहीं समझ पायेगा।
  • आप जब बोल रहें हों तो उसे आपकी ओर पूरा ध्यान देने के लिए प्रोत्साहित करे।
  • अपने बच्चे के कथन की आपके द्वारा अनुकृति उसे बोलने के लिए प्रोत्साहित करने में पर्याप्त उपयोगी सिद्घ होती हैं।
  • अपने बच्चे से सरल छोटे छोटे वाक्यों में बात करें।
  • आपके कथन / होट गतिशीलता के अपने बच्चे द्वारा अनुगमन करने को प्रोत्साहित करें क्योंकि इससे उसके बोलने के प्रयत्नों को बल मिता हैं। अपने बच्चे को बोलने के लिए आप कैसे सहायता कर सकते हैं।
  • अपने बच्चे के साथ ज्यादा समय बितायें।
  • बच्चे से लगातार बात करते ही रहें।
  • स्पष्ट बोलें, धीरे बोले सहज रूप से अर्थपूर्ण बात करें।
  • अपने आस पास की सभी चीजों के लिए उससे बात करें क्योंकि दैनिक जीवन की परिस्थितिया आपके बच्चे को बोलना सीखने के लिए अच्छा अवर प्रदान करती हैं।
  • वस्तुऐं के नाम /पर्यावरण की स्थितियों को दर्शाने वाले लेबल लगायें इससे बच्चा शब्दों को सीखता हैं।
  • अर्थपूर्ण बात कर दोहराते रहें।
  • बात करने की जरूरत पैदा करें, उसे बात करने हेतु प्रोत्साहित करें।
  • जब भी आप कुछ कर रहें हों उसका वर्णन करते रहें।
  • उसकी गतिविधियों का वर्णन करते हुए कमेनटेटर (वृतकार) की भूमिका निभायें। उदाहरण के लिए यदि वह कार के साथ खेल रहा हैं, तो आप कह सकते हैं " अच्छा, तो आपके पास कार हैं", "कार तो बडी हैं", " आप कार को कैसे धकेल रहें हो", " यह चली आपकी कार"।
  • प्रश्न पूछने के लिए उसे प्रोत्साहित करें।
  • सरल शब्दों तथा वाक्यों का प्रयोग करें।
  • शब्द तथा वाक्य पढाने के लिए चित्रों एवम्‌ वस्तुओं का प्रयोग करें।
  • बच्चों को कहानिया सुनायें।
  • यह सुनिश्चित करें कि बच्चा आपकी ओर अभिमुख हो और बात को सुनता रहें।
  • बच्चे के सामने जोर जोर से पढे।
  • बच्चे के साथ गाना गायें।
  • बच्चे के साथ मिलकर नाचें।
  • अपने आस-पास में होने वाली आवाजों और शोरों के बारें में उसे जागरुक बनाने में सहायता करें। यह आवाजें, शोर-शराबे वाले खेल, दरवाजे की घन्टी, प्रेशर कूकर, टेलीफोन की घन्टी, जानवरा आदि द्वारा की गई आवाजें।

"वह कुत्ता हैं," 'यह भौं भौं करता हैं ' वह आपके चेहरे की अभिव्यक्ति तथा आपके द्वारा आवाजों के अनुगमन को सुनकर के खुश होगा।

बच्चे से पूछें "कुत्ता क्या कहता हैं?" वह उत्तर देंते समय शायद कहें - " बू बू....." इस प्रकार के कथन को प्रोत्साहित करें और अनुकृति को दोहरायें (एक मुस्कान, स्पर्श यह सहलाने से वह एक बार और दोहरा सकता हैं)

इसी प्रकार आप उसे गाय, बिल्ली या कौआ दिखा सकते हैं और उसे विशिष्ट जानवर की आवाज आदि की अनुकृति करने के लिए कह सकते हैं।

गाय रम्भाती हैं .... " मा..मा..."

बिल्ली बोलती हैं ......"?म्याऊं, म्याऊं..."

कौआ बोलता हैं ......"का....का..."

ज्यादातर बच्चे इस प्रकार के अनुकारी खेल का आनन्द लेते हैं और इससे उनका ध्यान आपके चेहरे तथा आपकी आवाज को सुनने की ओर चला जाता हैं।

  • जब बच्चा खिलौनों से खेल रहा हो तथा कार, ट्रेन या ब्लाक से तो अपने बच्चे से कहिये :
  • "चलो हर कार चलाते हैं। कार कैसे जाती हैं: बर......"
  • उसका ध्यान 'सुनने ' पर खीचने के लिए अपनी आवाज़ के प्रति उसे आकर्षित करें।
  • शब्दोच्चारण तथा प्रतिकृति को प्रोत्साहित करने के लिए दर्पणो का प्रयोग किया जा सकता हैं।
  • दूसरे बच्चों के साथ उसे हिलमिल ने के लिए प्रोत्साहित करें।
  • उसे बोलने के अवसर उपलब्ध कराये।
  • उसे कहानी सुनाने के लिए कहें।
  • उसे ध्यानपूर्वक सुने।
  • नये शब्दों को समझायें।
  • आप क्या कर रहें और बच्चा क्य सीख पा रहा हैं उसकी डायरी रखें।
  • आप माता पिता से मिलें और अपने अनुभवों को उनके साथ बांटें।
  • मार्गदर्शन के लिए आवधिक रूप से विशेषज्ञों से सम्पर्क करते रहें।
  • उसकी अपने भाई-बहनों तथा उसकी आयु के अन्य बच्चों के साथ तुलना न करें।
  • उसकी सबलताओं का कम आकलन न करें।
  • अपने बच्चे को अपने आप कार्य करने दें उसे पर्यावरण जाचने परखने तथा सीखने का अवसर दें।
  • उसको न ज्यादा बचाव करें न ही अस्वीकार करें। अपने व्यवहार को एक समान रखें।
  • एक ही समय में उसे बहुत कुछ न पढाये।
  • बोलते समय अपने ओंठों तथा जीभ संचलन अत्याधिक न करें।
  • यदि बच्चे का बोलना स्पष्ट /पूर्ण नहीं हैं तो उसकी आलोचना न करें।
  • जब वह बोल रहा हो तो उसे बीच में मत टोकिए। ज्यादा अपेक्षा न रखें।
  • अपने बच्चे को अति सही मत करें।

और सबसे महत्वपूर्ण हैं यह याद रखना कि वह आपका बच्चा हैं और हर बच्चे की तरह वह आपका प्यार और दुलार का आकाक्षी हैं।

जानकारी:

http://bharat.gov.in, भारतीय राष्‍ट्रीय पोर्टल (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं)

अंतिम अद्यतन दिनांक: २७/०७/२०१२