योजनाएँ एवं सुविधाएँ

योजनाएँ एवं सुविधाओं का चयन:

अली यावरं जंग राष्ट्रीय श्रवण-विकलांग संस्थान
सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय,
भारत सरकार
बान्द्रां रिक्लेमेशन, बान्द्रा (पश्चिम),
के. सी. मार्ग, मुंबई - 400 050
दूरध्वनि : 022-2640 0215/0226
फैक्स : 022-2642 2638

केन्द्र एवं राज्य सरकार द्वारा दी जानेवाली सुविधाएँ एवं योजनाएँ:

सेवाएँ

अली यावरं जंग राष्ट्रीय श्रवण विकलांग संस्थान भारत में एक स्वायत्त संस्थान हैं। इसे 1983 में सामाजिक न्याय और अधिकारिंता मंत्रालय, भारत सरकार के आधीन शुरू किया गया था। इसका उद्देश्य विभिन्न गतिविधियों द्वारा श्रवण-विकलांग लोगों की सहायता करना हैं।

संस्थान एवं उसके विभिन्न केन्द्र संपूर्ण निदान, चिकित्सा, शैक्षिक एवं व्यावसायिक सेवाएँ श्रवण-विकलांग एवं गूंगे लोगों को देंते हैं। एक सुसंगठित समूह जिसमें ऑडियोलॉजिस्ट, स्पीच पेथौलॉजिस्ट, विशेष शिक्षकों, मनोवैज्ञानिकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, नाक-कान-गला विशेषज्ञों, बालरोग विशेषज्ञ एवं स्नायू विशेषज्ञ का समावेश हें, एक उच्च-स्तर की पुर्नवसन सेवाएँ प्रदान करते हैं।

सेवाएँ इस प्रकार हैं:

  1. श्रवण-विकलांग एवं गूंगे व्यक्तियों का परिक्षण एवं संपूर्ण निदान
  2. श्रवण-यंत्रों एवं कान के मोल्ड का चुनाव एवं उनकी फिटिंग
  3. श्रवण-विकलांगता प्रमाण-पत्र
  4. शैक्षिक परीक्षण एवं अभिभावक मार्गदर्शन
  5. व्यवसाय मार्गदर्शन, प्रशिक्षण एवं रोजगार
  6. वाचा एवं भाषा उपचार
  7. मानसिक उपचार, व्यवहारिक उपचार एवं खेल उपचार
  8. चिकित्सीय सलाह एवं मार्गदर्शन
  9. अभिभावक शिशु कार्यक्रम एवं प्री-स्कुल शिक्षा सेवाएँ
  10. राष्ट्रीय मुक्त विद्यालय - विकलांगों के शिक्षण के लिए मान्यता प्राप्त विशेष विद्यालय
  11. अभिभावकों द्वारा मार्गदर्शन एवं सलाह
  12. बहिर्गमन एवं विस्तारित सेवाएँ
  13. सामग्री विकास, वितरण एवं पत्राचार द्वारा सलाह
  14. सूचना
  15. विभिन्न संगठनों को तकनीकी सेवाएँ

संस्थान परीक्षण, निदान एवं श्रवण-यंत्रों की फिटिंग करने के मामले में उत्तम सेवाएँ प्रदान करता हैं। संस्थान उन श्रवण-विकलांग व्यक्तियों को मुफ्त सेवाएँ प्रदान करता हैं, जिनकी मासिक आय 5000 रुपयों से कम हैं। लाभार्थी अपनी इच्छानुसार पहले से मिलने का समय निश्चित कर सकते हैं। मरीजों को सलाह दी जाती हें कि वे अपना मासिक आय प्रमाण-पत्र, तहसीलदार, सांसद सदस्य, विधायक, नगर सेवक, सरपंच और नियोक्ती द्वारा प्रमाणित करके लाए। चूँकि परीक्षण की प्रनिया दो-तीन दिनों तक चल सकती हैं, संस्थान में आवास की उपलब्धता न होने के कारण, मरीजों को मुंबई में ठहरने की व्यवस्था स्वयं करनी पडती हैं।

जानकारी:

http://bharat.gov.in, भारतीय राष्‍ट्रीय पोर्टल (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं)

अंतिम अद्यतन दिनांक : २२/०३/२०१७