शैक्षणिक सेवाएँ

अली यावर जंग राष्ट्रीय वाक् एवं श्रवण दिव्यांगजन संस्थान में नेशनल इस्टिट्यूट ऑफ ओपन स्कूलिंग

अली यावर जंग राष्ट्रीय वाक् एवं श्रवण दिव्यांगजन संस्थान एक विशेष रूप से पंजीकृत संस्थान हैं, जो कि इंस्टिट्यूशन फॉर एज्युकेशन ऑफ डिंसएडवांटेंजड (SAIED) ऑफ द नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ ओपन स्कूलिंग से संबंधित हैं।

एनआइओएस, जो कि पहले नेशनल ओपन स्कूल के नाम से जाना जाता हैं, उन लोगों को अपनी शिक्षा पूर्ण करने के अवसर प्रदान करता हैं, जो अपनी स्कूली शिक्षा पूरी नही कर पाए, और प्राथमिक से स्नातक पूर्व स्तर तक के सामान्य, जीवन अभिवृद्घि तथा व्यवसायिक पाठ्यक्रमो के माध्यम से शिक्षण के अवसर भी प्रदान करता हैं।;

संस्थान एन.आइ.ओ.एस. हेतु अध्ययन केन्द्र के रूप में कार्य करता हैं, विशेषकर श्रवण बाधितो के लिए निरन्तर शिक्षा प्रदान करते हुए हेतु जनवरी, 2001 से निम्न पाठ्यक्रमो को संचालित करता हैं।

1) मुक्त आधारभूत शिक्षा

  • स्तर ए
  • स्तर बी
  • स्तर सी / मूलभूत पाठ्यक्रम (8वीं कक्षा)

प्रवेश परीक्षा का आयोजन - प्रवेश के लिए मापदण्ड

  • कोई आयु सीमा नही ।
  • स्तर ए, बी व सी में प्रवेश शैक्षिक योग्यता के आधार पर प्रवेश
  • स्तर सी के लिए 5वीं कक्षा का स्वय का प्रमाणपत्र। पढांई का माध्यम अंग्रेजी, हिंन्दी, मराठी..

2) माध्यामिक पाठ्यक्रम

प्रवेश के लिए मापदण्ड

  • कोई आयु सीमा नही
  • स्वय का प्रमाणपत्र या कक्षाआठवीं का उत्तीर्ण प्रमाणपत्र

अली यावर जंग राष्ट्रीय वाक् एवं श्रवण दिव्यांगजन संस्थान, यह राष्ट्रीय मुक्त विद्यालय के विकलांगों की शिक्षा के लिए विशेष प्राधिकृत संस्था हैं एम ए आइ इ डी। अली यावर जंग राष्ट्रीय वाक् एवं श्रवण दिव्यांगजन संस्थान - मुंबई के शिक्षा विभाग, 2री मंजिल पर हर शनिवार सुबह 10.00 बजे से दोपहर 3.30 तक सम्पर्क कार्यक्रम का आयोजन किया जाता हैं। अधिक जानकारी के लिए शिक्षा विभाग, दूसरी मंजिल, डी विंग में सम्पर्क करें।

प्री-स्कूल

श्रवण विकलांग बच्चो के शिक्षा और समग्र पुनर्वास में यथाशीघ्र बचपन में ही शिक्षा देंना - यह सफलता का मूलमत्र हैं। बच्चो के भाषा विकास की महत्वपूर्ण आयु (0-5 वर्ष) के दौरान भाषा सीखने संबंधित आवश्यक ज्ञान दिया जाए। बच्चों का भाषा अर्जन उचित और शीघ्रता से होता हैं। यह सर्वमान्य हैं। भाषा के आधार पर ही शिक्षा की बुनियादी नींव विकसित होती हैं। प्रारंभिक वर्षों में अर्थात्‌ प्री-स्कूल कालावधि ध्वनि नींव के विकास के लिए महत्वपूर्ण होता हैं।

बच्चो को व्यक्तिगत रूप से 'श्रवण मौखिक चिकित्सा' द्वारा भी सिखाया जाता हैं। जिन बच्चों का कॉकलियर इम्पलान्ट हुआ हैं उन्हे भी हंस्तक्षेपन /सहायता प्रदान करंते हैं। समाकलित बच्चों को भी सहायक सेवाएँ प्रदत्त की जाती हैं।

इसलिए शिक्षा-विभाग 3 से 5 वर्ष के श्रवण-विकलांग बच्चों के लिए एक प्री-स्कूल कार्यक्रम चलाता हैं।

श्रवण-विकलांगता बाधित बच्चो को समेकित शिक्षा के लिए तैयार करने हेंतु प्री-स्कूल निम्नलिखित बातों पर ध्यान केन्द्रित करता हैं :

  • अध्यापन की विविध पद्घतियो एवं प्रविधियों के द्वारा भाषा विकास
  • स्वय की सुनने की शक्ति का अधिकतम उपयोग।
  • वाचा विकास
  • वाचन एवं लेखन लेखन-कुशलताओं का विकास
  • बच्चो का सामाजिक, भावनात्मक, मानसिक, बौध्दिक एव समग्र विकास
  • शैक्षिक, क्रिया-कलापो में माता-पिता को ऐसे बच्चों की पढांई में समान सहभागी बनाने में सबल बनाना।

प्री-स्कूल शिक्षा पूरी तरह से निःशुल्क प्रदान की जाती हैं। अध्यापन का माध्यम अंग्रेजी, हिंन्दी एवं मराठी हैं। विभिन्न समूहो में बच्चों की कक्षाए दैंनिक रूप से प्री-स्कूल, 'इ' विंग तल मंजिल पर संचालित की जाती हैं।

शैक्षणिक मूल्यांकन

अभिभावकों को उनके श्रवण विकलांग बच्चों के लिए शैक्षणिक नियोजन संबंधी मार्गदर्शन करने के पहले उनका शैक्षणिक मूल्यांकन करना अनिवार्य हैं जिससे उन्हें योग्य शैक्षणिक संस्था/विद्यालय में जाने के लिए संस्तुति की जा सके।

इसलिए शिक्षा विभाग, श्रवण विकलांग बच्चों का शैक्षणिक मूल्यांकन कार्य किए जाते हैं। शैक्षणिक मूल्यांकन के अलावा श्रवण विकलांगों के अभिभावकों को घर पर भाषा उत्तेजना, भाषा की छूट और श्रवण विकलांगों को उपलब्ध सेवा-सुविधाएँ एवं रियायते आदि जानकारी दी जाती हैं। समाकलित श्रवण विकलांग बच्चों के लिए आधारभूत सेवाएँ भी दी जाती हैं।

जानकारी:

http://bharat.gov.in, भारतीय राष्‍ट्रीय पोर्टल (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं)

अंतिम अद्यतन दिनांक : २२/०३/२०१७